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mahabharat 12.1.0: नारायण रूपी भगवान श्रीकृष्ण (उनके नित्य मित्र), मनुष्य रूपी अर्जुन, भगवती सरस्वती (जो उनकी लीलाओं को प्रकट करती हैं) तथा महर्षि वेदव्यास (जो उनकी लीलाओं का संकलन करते हैं) को नमस्कार करके जय (महाभारत) का पाठ करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 0
 
 
श्लोक  12.1.0 
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥०॥
 
 
अनुवाद
नारायण रूपी भगवान श्रीकृष्ण (उनके नित्य मित्र), मनुष्य रूपी अर्जुन, भगवती सरस्वती (जो उनकी लीलाओं को प्रकट करती हैं) तथा महर्षि वेदव्यास (जो उनकी लीलाओं का संकलन करते हैं) को नमस्कार करके जय (महाभारत) का पाठ करना चाहिए।
 
One should recite Jai (Mahabharata) after saluting Lord Krishna in the form of Narayana (his daily friend), Arjun in the form of a human being, Bhagwati Saraswati (who reveals his pastimes) and Maharishi Ved Vyas (who compiles his pastimes).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)