श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.9.6 
याच्यमानेन सततं तव पुत्रेण भारत।
घातिता पृथिवी सर्वा वैरस्यान्तं विधित्सता॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भारतवर्ष! आपके पुत्र से सभी लोग सदैव शांति की प्रार्थना करते थे, फिर भी उसने शत्रुता मिटाने की इच्छा से सम्पूर्ण जगत् का विनाश कर दिया। 6॥
 
India Everyone always prayed to your son for peace, yet he destroyed the entire world with the desire to end the enmity. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)