Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.9.23: हे महापुरुष! आपको अपने मन को शांत करना चाहिए और शोक का त्याग कर देना चाहिए। आज आपको शोक से व्याकुल होकर अपने कर्तव्य का परित्याग नहीं करना चाहिए।॥23॥ | mahabharat अध्याय 11.9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मनाऽऽत्मानमाश्वास्य मा शुच: पुरुषर्षभ।
नाद्य शोकाभिभूतस्त्वं कार्यमुत्स्रष्टुमर्हसि॥ २३॥
अनुवाद
हे महापुरुष! आपको अपने मन को शांत करना चाहिए और शोक का त्याग कर देना चाहिए। आज आपको शोक से व्याकुल होकर अपने कर्तव्य का परित्याग नहीं करना चाहिए।॥23॥
‘O great man! You should reassure yourself and give up your grief. You should not give up your duty today because you are troubled by grief.’॥ 23॥
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि विदुरवाक्ये नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें विदुरजीका वाक्यविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥