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mahabharat 11.9.15: हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वायु चलती है और चारों ओर तिनके गिराती है, वैसे ही काल के प्रभाव से समस्त प्राणी आते-जाते रहते हैं॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 11.9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  11.9.15 
यथा वायुस्तृणाग्राणि संवर्तयति सर्वत:।
तथा कालवशं यान्ति भूतानि भरतर्षभ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वायु चलती है और चारों ओर तिनके गिराती है, वैसे ही काल के प्रभाव से समस्त प्राणी आते-जाते रहते हैं॥ 15॥
 
‘O best of the Bharatas! Just as the wind blows and drops straws all around, similarly all creatures come and go under the influence of time.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)