vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश
»
श्लोक 14
श्लोक
11.9.14
काल: कर्षति भूतानि सर्वाणि विविधानि च।
न कालस्य प्रिय: कश्चिन्न द्वेष्य: कुरुसत्तम॥ १४॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! काल नाना प्रकार के प्राणियों को खींचता है। क्योंकि काल को न तो कोई प्रिय है और न ही कोई द्वेष करने योग्य है॥14॥
‘Time pulls all the various creatures. O best of Kurus! For time, neither anyone is dear to it nor anyone is deserving of hatred.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×