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mahabharat 11.8.5: तदनन्तर बहुत समय के पश्चात् राजा धृतराष्ट्र को होश आया और वे अपने पुत्रों के लिए चिन्तित होकर बहुत समय तक विलाप करते रहे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.8.5 
अथ दीर्घस्य कालस्य लब्धसंज्ञो महीपति:।
विललाप चिरं कालं पुत्राधिभिरभिप्लुत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर बहुत समय के पश्चात् राजा धृतराष्ट्र को होश आया और वे अपने पुत्रों के लिए चिन्तित होकर बहुत समय तक विलाप करते रहे ॥5॥
 
Thereafter, after a long period of time, King Dhritarashtra regained consciousness and was worried about his sons and kept lamenting for a long time. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)