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mahabharat 11.8.47: इसलिए हे भरत! मेरी आज्ञा का पालन करो, यह समझो कि विधाता का निर्णय टाला नहीं जा सकता, और पाण्डवों पर दया करो, और अपने प्राणों को धारण करो॥47॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  11.8.47 
मम चैव नियोगेन विधेश्चाप्यनिवर्तनात्।
पाण्डवानां च कारुण्यात् प्राणान् धारय भारत॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे भरत! मेरी आज्ञा का पालन करो, यह समझो कि विधाता का निर्णय टाला नहीं जा सकता, और पाण्डवों पर दया करो, और अपने प्राणों को धारण करो॥47॥
 
Therefore, O Bharata, obey my command, understand that the decree of the Creator cannot be averted, and show mercy to the Pandavas, and hold on to your life. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)