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mahabharat 11.8.45: यह जानकर कि आप बार-बार दुःख से पीड़ित और व्याकुल हो रहे हैं, राजा युधिष्ठिर अपने प्राण भी त्याग देंगे।   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  11.8.45 
त्वां तु शोकेन संतप्तं मुह्यमानं मुहुर्मुहु:।
ज्ञात्वा युधिष्ठिरो राजा प्राणानपि परित्यजेत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि आप बार-बार दुःख से पीड़ित और व्याकुल हो रहे हैं, राजा युधिष्ठिर अपने प्राण भी त्याग देंगे।
 
Knowing that you are repeatedly tormented and bewildered by grief, King Yudhishthira will even give up his life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)