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mahabharat 11.8.43: हे राजन! कोई भी जीव या अजीव किसी भी प्रकार से भाग्य या काल के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  11.8.43 
अनतिक्रमणीयो हि विधी राजन् कथंचन।
कृतान्तस्य तु भूतेन स्थावरेण चरेण च॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कोई भी जीव या अजीव किसी भी प्रकार से भाग्य या काल के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता ॥ 43॥
 
O King! None of the living or non-living creatures can in any way transgress the laws of destiny or time. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)