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mahabharat 11.8.39-40: प्रभु! नारदजी के वचन सुनकर उस समय पाण्डव अत्यन्त चिन्तित हो गये। इस प्रकार मैंने देवताओं का यह सब सनातन रहस्य आपसे कहा है, जिससे आपका शोक किसी प्रकार नष्ट हो जाए। आप अपने प्राणों पर दया करें और देवताओं के विधान को समझकर पाण्डुपुत्रों पर भी आपकी प्रीति बनी रहे। ॥39-40॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  11.8.39-40 
नारदस्य वच: श्रुत्वा तदाशोचन्त पाण्डवा:।
एवं ते सर्वमाख्यातं देवगुह्यं सनातनम्॥ ३९॥
कथं ते शोकनाश: स्यात् प्राणेषु च दया प्रभो।
स्नेहश्च पाण्डुपुत्रेषु ज्ञात्वा दैवकृतं विधिम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! नारदजी के वचन सुनकर उस समय पाण्डव अत्यन्त चिन्तित हो गये। इस प्रकार मैंने देवताओं का यह सब सनातन रहस्य आपसे कहा है, जिससे आपका शोक किसी प्रकार नष्ट हो जाए। आप अपने प्राणों पर दया करें और देवताओं के विधान को समझकर पाण्डुपुत्रों पर भी आपकी प्रीति बनी रहे। ॥39-40॥
 
Prabhu! On hearing Naradji's words, the Pandavas became very worried at that time. In this way, I have told you all this eternal secret of the gods, so that your grief may be destroyed in some way. You may have mercy on your lives and understanding the law of the gods, your affection may remain for the sons of Pandu as well. ॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)