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mahabharat 11.8.28-29h: देवि! इस प्रकार उस युद्ध में तुम्हारा भार नष्ट हो जाएगा। सोभने! अब शीघ्र ही अपने स्थान पर जाकर समस्त लोकों को पहले जैसा कर दो। 28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  11.8.28-29h 
ततस्ते भविता देवि भारस्य युधि नाशनम्॥ २८॥
गच्छ शीघ्रं स्वकं स्थानं लोकान् धारय शोभने।
 
 
अनुवाद
देवि! इस प्रकार उस युद्ध में तुम्हारा भार नष्ट हो जाएगा। सोभने! अब शीघ्र ही अपने स्थान पर जाकर समस्त लोकों को पहले जैसा कर दो। 28 1/2॥
 
'Goddess! In this way your burden will be destroyed in that war. Sobhne! Now go quickly to your place and restore all the worlds as before. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)