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mahabharat 11.8.23-24: उस समय जगत पालन करने वाली पृथ्वी वहाँ एकत्रित देवताओं के पास गयी और बोली, 'हे श्रेष्ठ देवताओं! आपने उस दिन ब्रह्माजी के दरबार में मेरा कार्य पूरा करने का वचन दिया था, कृपया उसे शीघ्र पूरा करें।'   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  11.8.23-24 
उपगम्य तदा धात्री देवानाह समागतान्॥ २३॥
यत् कार्यं मम युष्माभिर्ब्रह्मण: सदने तदा।
प्रतिज्ञातं महाभागास्तच्छीघ्रं संविधीयताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय जगत पालन करने वाली पृथ्वी वहाँ एकत्रित देवताओं के पास गयी और बोली, 'हे श्रेष्ठ देवताओं! आपने उस दिन ब्रह्माजी के दरबार में मेरा कार्य पूरा करने का वचन दिया था, कृपया उसे शीघ्र पूरा करें।'
 
At that time, the world-sustaining Earth went to the gods assembled there and said, 'O great gods! You had promised to accomplish my task that day in the court of Brahma, please complete it quickly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)