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mahabharat 11.8.22-23h: अनघ! नारद आदि सभी ऋषिगण भी वहाँ उपस्थित थे। पृथ्वीनाथ! मैंने वहाँ इस पृथ्वी को भी देखा, जो किसी कार्य से देवताओं के पास गयी थी।   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  11.8.22-23h 
नारदप्रमुखाश्चापि सर्वे देवर्षयोऽनघ।
तत्र चापि मया दृष्टा पृथिवी पृथिवीपते॥ २२॥
कार्यार्थमुपसम्प्राप्ता देवतानां समीपत:।
 
 
अनुवाद
अनघ! नारद आदि सभी ऋषिगण भी वहाँ उपस्थित थे। पृथ्वीनाथ! मैंने वहाँ इस पृथ्वी को भी देखा, जो किसी कार्य से देवताओं के पास गयी थी।
 
Anagh! All the sages like Narada were also present there. Prithvinath! I also saw this earth there, who had gone to the gods for some work. 22 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)