Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.8.15: हे भारतपुत्र! जब यह प्राणियों का संसार अनित्य है, सनातन परमपद नित्य है और यह जीवन मृत्यु में ही समाप्त होता है, तब तुम इसके लिए शोक क्यों करते हो?॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अध्रुवे जीवलोके च स्थाने वा शाश्वते सति।
जीविते मरणान्ते च कस्माच्छोचसि भारत॥ १५॥
अनुवाद
हे भारतपुत्र! जब यह प्राणियों का संसार अनित्य है, सनातन परमपद नित्य है और यह जीवन मृत्यु में ही समाप्त होता है, तब तुम इसके लिए शोक क्यों करते हो?॥ 15॥
O son of Bharat! When the world of living beings is temporary, the eternal supreme position is permanent and this life ends in death only, then why do you grieve for it?॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥