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mahabharat 11.8.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! विदुरजी के ये वचन सुनकर कौरवों में श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र पुत्र शोक से व्याकुल होकर पृथ्वी पर गिर पड़े और मूर्छित हो गए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 11.8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.8.1 
वैशम्पायन उवाच
विदुरस्य तु तद् वाक्यं निशम्य कुरुसत्तम:।
पुत्रशोकाभिसंतप्त: पपात भुवि मूर्च्छित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! विदुरजी के ये वचन सुनकर कौरवों में श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र पुत्र शोक से व्याकुल होकर पृथ्वी पर गिर पड़े और मूर्छित हो गए॥1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Hearing these words of Vidurji, the best king of Kurus, Dhritarashtra, fell on the earth, overcome with grief for his son and fell unconscious. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)