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mahabharat 11.7.6: हे भारतश्रेष्ठ! यह मनुष्यों और स्थावर-जंगम प्राणियों का संसार चक्र है। बुद्धिमान पुरुष को इसमें आसक्त नहीं होना चाहिए। 6॥   |   mahabharat अध्याय 11.7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.7.6 
सोऽयं लोकसमावर्तो मर्त्यानां भरतर्षभ।
चराणां स्थावराणां च न गृध्येत् तत्र पण्डित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! यह मनुष्यों और स्थावर-जंगम प्राणियों का संसार चक्र है। बुद्धिमान पुरुष को इसमें आसक्त नहीं होना चाहिए। 6॥
 
Bharatshrestha! This is the world cycle of humans and movable and immovable creatures. A wise man should not get attached to this. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)