श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना  »  श्लोक 29-d1
 
 
श्लोक  11.7.29-d1 
सुसूक्ष्मदृष्टयो राजन् व्रजन्ति ब्रह्म शाश्वतम्॥ २९॥
(एवं ज्ञात्वा महाप्राज्ञ स तेषामौर्ध्वदैहिकम्।
कर्तुमर्हति तेनैव फलं प्राप्स्यति वै भवान्॥ )
 
 
अनुवाद
राजन! महामुनि! ऐसा जानकर सूक्ष्म दृष्टि वाले ज्ञानी पुरुष सनातन ब्रह्म को प्राप्त होकर अपने मृत स्वजनों का अर्ध्य संस्कार करें। इस प्रकार आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी। 29॥
 
Rajan! Great sage! Knowing this, knowledgeable persons with microscopic vision attain Sanatan Brahma, perform half body rites of your dead relatives. This way you will get good results. 29॥
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि धृतराष्ट्रविशोककरणे सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें धृतराष्ट्रके शोकका निवारणविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३० श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)