Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.7.27-28h: हे भारत! यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि जीवों को अपनी आत्मा से अधिक प्रिय कुछ भी नहीं है; अतः कोई भी जीव मरना पसंद नहीं करता; अतः विद्वान पुरुष को सभी जीवों पर दया करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 11.7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ह्यात्मन: प्रियतरं किंचिद् भूतेषु निश्चितम्।
अनिष्टं सर्वभूतानां मरणं नाम भारत॥ २७॥
तस्मात् सर्वेषु भूतेषु दया कार्या विपश्चिता।
अनुवाद
हे भारत! यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि जीवों को अपनी आत्मा से अधिक प्रिय कुछ भी नहीं है; अतः कोई भी जीव मरना पसंद नहीं करता; अतः विद्वान पुरुष को सभी जीवों पर दया करनी चाहिए।
O Bharata! It can be said with certainty that nothing is dearer to the living beings than their soul; therefore, no living being likes to die; hence, a learned person should show mercy to all living beings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥