vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना
»
श्लोक 26
श्लोक
11.7.26
न तत् क्रतुसहस्रेण नोपवासैश्च नित्यश:।
अभयस्य च दानेन यत् फलं प्राप्नुयान्नर:॥ २६॥
अनुवाद
रक्षा करने से मनुष्य को जो फल मिलता है, वह प्रतिदिन हजारों यज्ञ और व्रत करने से भी नहीं मिल सकता ॥26॥
The reward which a man gets by giving protection cannot be obtained even by performing thousands of sacrifices and fasting every day. ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×