श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  11.7.22 
न विक्रमो न चाप्यर्थो न मित्रं न सुहृज्जन:।
तथोन्मोचयते दु:खाद् यथाऽऽत्मा स्थिरसंयम:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शक्ति, धन, मित्र और शुभचिंतक भी दुःख से उस प्रकार छुटकारा नहीं दिला सकते जिस प्रकार दृढ़ अनुशासन में रहने वाला मनुष्य का मन दिला सकता है ॥ 22॥
 
Power, wealth, friends and well-wishers cannot provide relief from sorrow the way a person's mind which remains firmly disciplined can do so. ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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