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mahabharat 11.7.2: विदुरजी बोले- राजन! सुनो। मैं पुनः इस मार्ग का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ, जिसे सुनकर बुद्धिमान पुरुष संसार के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.7.2 
विदुर उवाच
शृणु भूय: प्रवक्ष्यामि मार्गस्यैतस्य विस्तरम्।
यच्छ्रुत्वा विप्रमुच्यन्ते संसारेभ्यो विचक्षणा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी बोले- राजन! सुनो। मैं पुनः इस मार्ग का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ, जिसे सुनकर बुद्धिमान पुरुष संसार के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
 
Vidurji said- Rajan! Listen. I again describe this path in detail, hearing which wise men become free from the bondage of the world. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)