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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना
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श्लोक 18
श्लोक
11.7.18
यतेन्द्रियो नरो राजन् क्रोधलोभनिराकृत:।
संतुष्ट: सत्यवादी य: स शान्तिमधिगच्छति॥ १८॥
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, क्रोध और लोभ से रहित है, संतोषी और सत्यवादी है, वह शांति को प्राप्त होता है॥18॥
King! A person who has controlled his senses, is free from anger and greed, is content and truthful, attains peace. ॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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