Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.7.11-12: वर्ष, मास, पक्ष, दिन-रात और संध्याएँ क्रमशः इसके रूप और आयु का शोषण करते रहते हैं। ये सभी काल के प्रतिनिधि हैं। मूर्ख लोग इन्हें इस रूप में नहीं जानते। महापुरुष कहते हैं कि विधाता ने सभी प्राणियों के कर्मों के अनुसार उनके माथे पर रेखा खींची है (उनकी आयु और उनके प्रारब्ध के अनुसार सुख-दुःख का भोग निर्धारित किया है)। | mahabharat अध्याय 11.7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्ष, मास, पक्ष, दिन-रात और संध्याएँ क्रमशः इसके रूप और आयु का शोषण करते रहते हैं। ये सभी काल के प्रतिनिधि हैं। मूर्ख लोग इन्हें इस रूप में नहीं जानते। महापुरुष कहते हैं कि विधाता ने सभी प्राणियों के कर्मों के अनुसार उनके माथे पर रेखा खींची है (उनकी आयु और उनके प्रारब्ध के अनुसार सुख-दुःख का भोग निर्धारित किया है)।
Year, month, fortnight, day-night and evenings keep exploiting its form and age respectively. All these are the representatives of time. Foolish people do not know them in this form. The great men say that the Creator has drawn a line on the forehead of all beings according to their deeds (has determined their age and the enjoyment of happiness and sorrow according to their destiny).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥