|
| |
| |
श्लोक 11.7.1  |
धृतराष्ट्र उवाच
अहोऽभिहितमाख्यानं भवता तत्त्वदर्शिना।
भूय एव तु मे हर्ष: श्रुत्वा वागमृतं तव॥ १॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र बोले- विदुर! आपने बड़ी सुन्दर कथा कही है। आप सचमुच सत्य के ज्ञाता हैं। आपकी अमृतमयी वाणी को पुनः सुनकर मुझे बहुत प्रसन्नता होगी॥1॥ |
| |
| Dhritarashtra said- Vidur! You have narrated a wonderful story. You are truly a knower of truth. I will be very happy to hear your nectar-like voice again.॥ 1॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|