Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.6.5: जिसे दुर्गम स्थान कहा गया है, वह स्वयं विशाल जगत् है और जिसे दुर्गम वन कहा गया है, वह स्वयं जगत् का गहनतम रूप है ॥5॥ | mahabharat अध्याय 11.6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उच्यते यत् तु कान्तारं महासंसार एव स:।
वनं दुर्गं हि यच्चैतत् संसारगहनं हि तत्॥ ५॥
अनुवाद
जिसे दुर्गम स्थान कहा गया है, वह स्वयं विशाल जगत् है और जिसे दुर्गम वन कहा गया है, वह स्वयं जगत् का गहनतम रूप है ॥5॥
What has been described as an inaccessible place is the vast world itself, and what has been described as an inaccessible forest is the deepest form of the world itself. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥