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mahabharat 11.6.4: विदुर जी बोले - हे राजन! यह मोक्ष के सिद्धान्त का विद्वानों द्वारा बताया गया उदाहरण है। इसे समझकर वैराग्य धारण करने से मनुष्य को परलोक में अपने पुण्य कर्मों का फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 11.6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  11.6.4 
विदुर उवाच
उपमानमिदं राजन् मोक्षविद्भिरुदाहृतम्।
सुकृतं विन्दते येन परलोकेषु मानव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे राजन! यह मोक्ष के सिद्धान्त का विद्वानों द्वारा बताया गया उदाहरण है। इसे समझकर वैराग्य धारण करने से मनुष्य को परलोक में अपने पुण्य कर्मों का फल मिलता है।
 
Vidur Ji said - O King! This is an example told by the scholars of the principles of salvation. By understanding this and adopting detachment, a man gets the fruits of his good deeds in the next world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)