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mahabharat 11.6.14: विद्वान् पुरुष संसारचक्र की गति को जानते हैं, इसलिए वे वैराग्यरूपी शस्त्र से उसके समस्त बंधनों को काट डालते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 11.6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.6.14 
एवं संसारचक्रस्य परिवृत्तिं विदुर्बुधा:।
येन संसारचक्रस्य पाशांश्छिन्दन्ति वै बुधा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् पुरुष संसारचक्र की गति को जानते हैं, इसलिए वे वैराग्यरूपी शस्त्र से उसके समस्त बंधनों को काट डालते हैं ॥14॥
 
Learned men know the movement of the wheel of the world and so they cut off all its bonds with the weapon of detachment. ॥14॥
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि धृतराष्ट्रविशोककरणे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें धृतराष्ट्रके शोकका निवारणविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)