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mahabharat 11.6.12-13: और वहाँ बताई गई सभी मधुमक्खियाँ कामनाएँ हैं। मधु की जो अनेक धाराएँ बहती रहती हैं, उन्हें प्रेमरूपी अमृत जानना चाहिए, जिसमें सभी मनुष्य डूब जाते हैं॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 11.6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  11.6.12-13 
ये ते मधुकरास्तत्र कामास्ते परिकीर्तिता:॥ १२॥
यास्तु ता बहुशो धारा: स्रवन्ति मधुनिस्रवम्।
तांस्तु कामरसान् विद्याद् यत्र मज्जन्ति मानवा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
और वहाँ बताई गई सभी मधुमक्खियाँ कामनाएँ हैं। मधु की जो अनेक धाराएँ बहती रहती हैं, उन्हें प्रेमरूपी अमृत जानना चाहिए, जिसमें सभी मनुष्य डूब जाते हैं॥12-13॥
 
And all the bees mentioned there are desires. The many streams of honey that keep flowing should be known as the nectar of love, in which all human beings drown.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)