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mahabharat 11.5.9-10h: वह विशाल वन पर्वतों के समान ऊँचे पाँच मुख वाले सर्पों और आकाश तक पहुँचने वाले विशाल वृक्षों से भरा हुआ है। ॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  11.5.9-10h 
पञ्चशीर्षधरैर्नागै: शैलैरिव समुन्नतै:॥ ९॥
नभ:स्पृशैर्महावृक्षै: परिक्षिप्तं महावनम्।
 
 
अनुवाद
वह विशाल वन पर्वतों के समान ऊँचे पाँच मुख वाले सर्पों और आकाश तक पहुँचने वाले विशाल वृक्षों से भरा हुआ है। ॥9 1/2॥
 
That vast forest is filled with five-headed serpents as tall as mountains and huge trees reaching the sky. ॥ 9 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)