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mahabharat 11.5.8-9h: अचानक उसने देखा कि वह भयानक जंगल चारों ओर से जालों से घिरा हुआ है और एक बहुत ही डरावनी स्त्री ने उसे अपनी दोनों भुजाओं से घेर रखा है।   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  11.5.8-9h 
अथापश्यद् वनं घोरं समन्ताद् वागुरावृतम्॥ ८॥
बाहुभ्यां सम्परिक्षिप्तं स्त्रिया परमघोरया।
 
 
अनुवाद
अचानक उसने देखा कि वह भयानक जंगल चारों ओर से जालों से घिरा हुआ है और एक बहुत ही डरावनी स्त्री ने उसे अपनी दोनों भुजाओं से घेर रखा है।
 
Suddenly he saw that the dreadful forest was surrounded by nets on all sides and a very scary woman had surrounded it with both her arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)