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mahabharat 11.5.7-8h: उन हिंसक पशुओं का बिल देखकर वह भयभीत हो गया और भागने लगा; परन्तु न तो वह वहाँ से निकल सका और न ही उन्होंने उसका पीछा करना छोड़ा।   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  11.5.7-8h 
स तेषां छिद्रमन्विच्छन् प्रद्रुतो भयपीडित:॥ ७॥
न च निर्याति वै दूरं न वा तैर्विप्रमोच्यते।
 
 
अनुवाद
उन हिंसक पशुओं का बिल देखकर वह भयभीत हो गया और भागने लगा; परन्तु न तो वह वहाँ से निकल सका और न ही उन्होंने उसका पीछा करना छोड़ा।
 
Seeing the hole of those ferocious animals, he became frightened and started running; but he was neither able to get away from there nor did they stop chasing him. 7 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)