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mahabharat 11.5.5-6h: हे शत्रुदमन! उस स्थान को देखकर ब्राह्मण का हृदय अत्यन्त व्याकुल हो गया। उसके रोंगटे खड़े हो गए तथा मन में नाना प्रकार की चिन्ताएँ उत्पन्न होने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  11.5.5-6h 
तदस्य दृष्ट्वा हृदयमुद्वेगमगमत् परम्॥ ५॥
अभ्युच्छयश्च रोम्णां वै विक्रियाश्च परंतप।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुदमन! उस स्थान को देखकर ब्राह्मण का हृदय अत्यन्त व्याकुल हो गया। उसके रोंगटे खड़े हो गए तथा मन में नाना प्रकार की चिन्ताएँ उत्पन्न होने लगीं।
 
O King of Shatrudaman! On seeing that place the Brahmin's heart became very agitated. He got goosebumps and other kinds of disturbances started arising in his mind. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)