श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.5.2 
विदुर उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि नमस्कृत्वा स्वयम्भुवे।
यथा संसारगहनं वदन्ति परमर्षय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले- हे राजन! मैं भगवान स्वयंभू को प्रणाम करता हूँ और संसार के स्वरूप को घने वन के समान बताता हूँ, जिसका वर्णन बड़े-बड़े ऋषियों ने किया है।
 
Vidur Ji said- O King! I bow before Lord Swayambhu and describe the nature of the world as a dense forest, which is described by great sages.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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