श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  11.5.18-19h 
तेषां मधूनां बहुधा धारा प्रस्रवते तदा॥ १८॥
आलम्बमान: स पुमान् धारां पिबति सर्वदा।
 
 
अनुवाद
उस समय वहाँ शहद की अनेक धाराएँ बह रही थीं और फाँसी पर लटका हुआ आदमी लगातार उस शहद की धारा को पी रहा था।
 
At that time many streams of honey were flowing there and the hanging man was continuously drinking that stream of honey. 18 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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