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mahabharat 11.5.17-18h: हे भरतश्रेष्ठ! वे मक्खियाँ उस मधु को बार-बार पीना चाहती थीं, जो सब प्राणियों को स्वादिष्ट लगता है और जो बालकों को आकर्षित करता है। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  11.5.17-18h 
भूयो भूय: समीहन्ते मधूनि भरतर्षभ॥ १७॥
स्वादनीयानि भूतानां यैर्बालो विप्रकृष्यते।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वे मक्खियाँ उस मधु को बार-बार पीना चाहती थीं, जो सब प्राणियों को स्वादिष्ट लगता है और जो बालकों को आकर्षित करता है। 17 1/2
 
O best of the Bharatas! Those flies wanted to drink again and again that honey which is tasty to all creatures and which attracts the children. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)