Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.5.15-17h: वह धीरे-धीरे उस कुएँ की ओर बढ़ रहा था जो लताओं और वृक्षों से घिरा हुआ था। ब्राह्मण उस पेड़ की शाखा पर लटका हुआ था, जिसकी छोटी-छोटी टहनियों पर, छत्तों से उत्पन्न, अनेक प्रकार की, भयंकर और खतरनाक, आकृतियाँ वाली मधुमक्खियाँ पहले से ही शहद को घेरे बैठी थीं। | mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह धीरे-धीरे उस कुएँ की ओर बढ़ रहा था जो लताओं और वृक्षों से घिरा हुआ था। ब्राह्मण उस पेड़ की शाखा पर लटका हुआ था, जिसकी छोटी-छोटी टहनियों पर, छत्तों से उत्पन्न, अनेक प्रकार की, भयंकर और खतरनाक, आकृतियाँ वाली मधुमक्खियाँ पहले से ही शहद को घेरे बैठी थीं।
He was gradually moving towards that well surrounded by creepers and trees. The Brahmin was hanging on the branch of the tree, on its small twigs, many bees of various shapes, fierce and dangerous, born from the honeycombs, were already sitting surrounding the honey.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥