श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  11.5.11-12h 
पपात स द्विजस्तत्र निगूढे सलिलाशये॥ ११॥
विलग्नश्चाभवत् तस्मिन् लतासंतानसंकुले।
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण उस छिपे हुए कुएँ में गिर पड़ा, परन्तु वह चारों ओर लताओं और लताओं से घिरा होने के कारण उसमें उलझकर नीचे नहीं गिरा, अपितु उसके ऊपर ही लटका रहा ॥11 1/2॥
 
The Brahmin fell into the hidden well, but because it was surrounded by creepers and vines, he did not get entangled in it and fall down, but remained hanging above it. ॥ 11 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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