श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  11.5.10-11h 
वनमध्ये च तत्राभूदुदपान: समावृत:॥ १०॥
वल्लीभिस्तृणछन्नाभिर्दृढाभिरभिसंवृत:।
 
 
अनुवाद
उस जंगल के अन्दर एक कुआँ था, जो चारों ओर से घास से ढकी मजबूत लताओं से ढका हुआ था।
 
There was a well inside that forest, which was covered from all sides with strong vines covered with grass.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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