Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.4.9: एक बार उनसे बंध जाने पर वह कभी संतुष्ट नहीं होता। उस अवस्था में भले ही वह अच्छे या बुरे कर्म करता हो, फिर भी वह उनके विषय में कुछ भी नहीं समझ पाता।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 11.4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.4.9 
बध्यमानश्च तैर्भूयो नैव तृप्तिमुपैति स:।
तदा नावैति चैवायं प्रकुर्वन् साध्वसाधु वा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
एक बार उनसे बंध जाने पर वह कभी संतुष्ट नहीं होता। उस अवस्था में भले ही वह अच्छे या बुरे कर्म करता हो, फिर भी वह उनके विषय में कुछ भी नहीं समझ पाता।॥9॥
 
Once bound to them, he is never satisfied. In that state, even though he performs good or bad deeds, he is unable to understand anything about them.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)