श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.4.7 
तत: प्राप्तोत्तरे काले व्याधयश्चापि तं तथा।
उपसर्पन्ति जीवन्तं बध्यमानं स्वकर्मभि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, जैसे-जैसे समय बीतता है, कर्मों से बंधी हुई आत्मा जीवित रहते हुए नई-नई व्याधियाँ भोगने लगती है ॥7॥
 
Thereafter, as time goes by, the soul bound by its karmas begins to suffer new ailments while alive. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)