श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.4.10 
तथैव परिरक्षन्ति ये ध्यानपरिनिष्ठिता:।
अयं न बुध्यते तावद् यमलोकमथागतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो लोग भगवान के ध्यान में लीन रहते हैं, वे ही शास्त्रों का पालन करके अपनी रक्षा कर सकते हैं। साधारण प्राणी तो अपने सामने स्थित यमलोक को भी नहीं समझ सकता।॥10॥
 
Only those who remain engrossed in the meditation of God can protect themselves by following the scriptures. An ordinary being cannot even understand the Yamaloka that is in front of him.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)