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mahabharat 11.3.9: जैसे मनुष्य पुराने या नए वस्त्रों को उतारकर नए वस्त्र पहनने की इच्छा करता है, वैसे ही देहधारी प्राणी समय-समय पर शरीर त्यागते और पुनः ग्रहण करते रहते हैं। ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.3.9 
यथा जीर्णमजीर्णं वा वस्त्रं त्यक्त्वा तु पूरुष:।
अन्यद् रोचयते वस्त्रमेवं देहा: शरीरिणाम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे मनुष्य पुराने या नए वस्त्रों को उतारकर नए वस्त्र पहनने की इच्छा करता है, वैसे ही देहधारी प्राणी समय-समय पर शरीर त्यागते और पुनः ग्रहण करते रहते हैं। ॥9॥
 
Just as a man desires to take off old or new clothes and wear new ones, similarly the bodies of embodied beings are given up and taken back by them from time to time. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)