Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.3.8: विद्वान लोग नश्वर प्राणियों के शरीरों को घर के समान बताते हैं; क्योंकि सभी शरीर समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, परंतु उसके भीतर स्थित आत्मा, जो सत्व का एकमात्र स्वरूप है, शाश्वत है ॥8॥ | mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहाणीव हि मर्त्यानामाहुर्देहानि पण्डिता:।
कालेन विनियुज्यन्ते सत्त्वमेकं तु शाश्वतम्॥ ८॥
अनुवाद
विद्वान लोग नश्वर प्राणियों के शरीरों को घर के समान बताते हैं; क्योंकि सभी शरीर समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, परंतु उसके भीतर स्थित आत्मा, जो सत्व का एकमात्र स्वरूप है, शाश्वत है ॥8॥
Scholars describe the bodies of mortal beings as being like houses; Because all bodies are destroyed with time, but the soul within it, which is the only form of Sattva, is eternal. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥