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ये तु प्राज्ञा: स्थिता: सत्त्वे संसारेऽस्मिन् हितैषिण:।
समागमज्ञा भूतानां ते यान्ति परमां गतिम्॥ २०॥
अनुवाद
इस संसार में जो बुद्धिमान मनुष्य सत्वगुण से युक्त हैं, सबका कल्याण चाहते हैं और जीवों के कर्मानुसार उनके व्यवहार को समझते हैं, वे परम गति को प्राप्त होते हैं।
The intelligent human beings in this world who possess Sattva Guna, seek the welfare of all and understand the interaction of living beings according to their actions, attain the supreme state.
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि धृतराष्ट्रविशोककरणे तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें धृतराष्ट्रके शोकका निवारणविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥