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mahabharat 11.3.10: हे विचित्रवीर्य नन्दन! यदि सुख या दुःख मिलना है, तो वह अपने कर्मों के अनुसार ही मिलता है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.3.10 
वैचित्रवीर्य प्राप्यं हि दु:खं वा यदि वा सुखम्।
प्राप्नुवन्तीह भूतानि स्वकृतेनैव कर्मणा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे विचित्रवीर्य नन्दन! यदि सुख या दुःख मिलना है, तो वह अपने कर्मों के अनुसार ही मिलता है॥10॥
 
O Vichitravirya Nandan! If one is going to get happiness or sorrow, then one gets it according to one's own deeds.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)