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mahabharat 11.27.6-7h: महाराज! तत्पश्चात कुन्तीदेवी सहसा शोक से विह्वल हो गयीं और रोने लगीं और धीमे स्वर में अपने पुत्रों से कहने लगीं - 6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  11.27.6-7h 
तत: कुन्ती महाराज सहसा शोककर्शिता॥ ६॥
रुदती मन्दया वाचा पुत्रान् वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात कुन्तीदेवी सहसा शोक से विह्वल हो गयीं और रोने लगीं और धीमे स्वर में अपने पुत्रों से कहने लगीं - 6 1/2॥
 
Maharaj! Thereafter, Kuntidevi suddenly became overcome with grief and started crying and said to her sons in a low voice - 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)