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mahabharat 11.27.25-27h: राजन! इस प्रकार विलाप करके धर्मराज युधिष्ठिर जोर-जोर से रोने लगे। रोते-रोते उन्होंने कर्ण को धीरे-धीरे जल पिलाया। यह सब सुनकर वहाँ एकत्रित हुई सभी स्त्रियाँ, जो जहाँ-तहाँ जल पिलाने के लिए खड़ी थीं, अचानक जोर-जोर से रोने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 25-27h
 
 
श्लोक  11.27.25-27h 
एवं विलप्य बहुलं धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ २५॥
व्यरुदच्छनकै राजंश्चकारास्योदकं प्रभु:।
ततो विनेदु: सहसा स्त्रियस्ता: खलु सर्वश:॥ २६॥
अभितो या: स्थितास्तत्र तस्मिन्नुदककर्मणि।
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार विलाप करके धर्मराज युधिष्ठिर जोर-जोर से रोने लगे। रोते-रोते उन्होंने कर्ण को धीरे-धीरे जल पिलाया। यह सब सुनकर वहाँ एकत्रित हुई सभी स्त्रियाँ, जो जहाँ-तहाँ जल पिलाने के लिए खड़ी थीं, अचानक जोर-जोर से रोने लगीं।
 
King! After lamenting in this manner, Dharmaraja Yudhishthira started crying profusely. While crying, he slowly offered water to Karna. Hearing all this, all the women gathered there, who were standing everywhere to offer water, suddenly started crying loudly. 25-26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)