Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.27.24-25h: अब मैं कर्ण के शोक में पूरी तरह डूब गया हूँ और इस प्रकार जल रहा हूँ मानो किसी ने मुझे जलती हुई आग में डाल दिया हो। यदि मुझे यह बात पहले से पता होती, तो कर्ण को पाकर इस संसार में कोई भी स्वर्गीय वस्तु हमारे लिए अप्राप्य न होती और कुरुवंश का अन्त करने वाला यह भयंकर युद्ध न होता।॥24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं कर्ण के शोक में पूरी तरह डूब गया हूँ और इस प्रकार जल रहा हूँ मानो किसी ने मुझे जलती हुई आग में डाल दिया हो। यदि मुझे यह बात पहले से पता होती, तो कर्ण को पाकर इस संसार में कोई भी स्वर्गीय वस्तु हमारे लिए अप्राप्य न होती और कुरुवंश का अन्त करने वाला यह भयंकर युद्ध न होता।॥24 1/2॥
'Now I am completely drowned in the grief of Karna and burning like this as if someone has placed me in a burning fire. If I had known this earlier, then after getting Karna, no heavenly thing in this world would have been unattainable for us and this terrible war that ended the Kuru clan would not have happened.'॥ 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥