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mahabharat 11.27.22-23: यह दुःख मुझे द्रौपदीपुत्र अभिमन्यु, पांचालों के विनाश और कुरुवंश के पतन से हुए दुःख से भी सौ गुना अधिक कष्ट दे रहा है॥ 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  11.27.22-23 
अभिमन्योर्विनाशेन द्रौपदेयवधेन च॥ २२॥
पञ्चालानां विनाशेन कुरूणां पतनेन च।
तत: शतगुणं दु:खमिदं मामस्पृशद् भृशम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह दुःख मुझे द्रौपदीपुत्र अभिमन्यु, पांचालों के विनाश और कुरुवंश के पतन से हुए दुःख से भी सौ गुना अधिक कष्ट दे रहा है॥ 22-23॥
 
'This sorrow is troubling me a hundred times more than the sorrow we felt at the destruction of Abhimanyu, Draupadi's son, the Panchalas and the fall of the Kuru clan.॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)