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mahabharat 11.27.18-19h: ‘जैसे हम लोग गाण्डीवधारी अर्जुन के बल का आश्रय लेते थे, वैसे ही धृतराष्ट्र के पुत्रों ने भी सदैव उसके बाहुबल का ही आश्रय लिया था।॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  11.27.18-19h 
यस्य बाहुबलं नित्यं धार्तराष्ट्रैरुपासितम्॥ १८॥
उपासितं यथास्माभिर्बलं गाण्डीवधन्वन:।
 
 
अनुवाद
‘जैसे हम लोग गाण्डीवधारी अर्जुन के बल का आश्रय लेते थे, वैसे ही धृतराष्ट्र के पुत्रों ने भी सदैव उसके बाहुबल का ही आश्रय लिया था।॥18 1/2॥
 
‘The sons of Dhritarashtra had always relied on his physical strength, just as we had taken shelter in the strength of Gandiva-wielding Arjuna.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)